10 आदतें जो तुम्हारे दाँतों को नुक़सान पहुँचाती हैं
10 चीज़ें जो दाँतों को नुक़सान पहुँचाती हैं — और बेहतर डेंटल हेल्थ के लिए इन्हें कैसे छोड़ें, टिप्स। हम सब की कुछ बुरी आदतें हैं जिन्हें हम छोड़ना चाहते हैं या दोस्तों-परिवार में देखते हैं। यहाँ 10 ऐसी आदतें हैं जो दाँतों को नुक़सान पहुँचा सकती हैं।
1. नाखून चबाना
ये एक नर्वस आदत है जो जबड़े पर असर डाल सकती है। लंबे वक़्त तक जबड़े को इस पोज़िशन में रखने से प्रेशर बनता है और जबड़े की समस्या हो सकती है। साथ ही चबाने से हानिकारक बैक्टीरिया मुंह में आते हैं — और नाखून सख़्त हैं तो दाँत ग़लत तरीक़े से घिस सकते हैं।
हल: कड़वा-स्वाद वाला नेल पॉलिश (अक्सर कलरलेस) लगाओ — एक तो स्वाद बुरा होगा, दूसरा उंगलियाँ मुंह से बाहर रखने की याद दिलाएगा। स्ट्रेस कम करना और छोटे यथार्थवादी गोल्स रखना — भी अच्छा हल है। अगर कुछ ख़ास सिचुएशन ट्रिगर हैं, तो उंगलियों को व्यस्त रखने के लिए कुछ हाथ में रखो।
2. बहुत ज़ोर से ब्रश करना
रोज़ दो बार ब्रश करना सबसे अच्छी आदतों में से एक है। बस सुनिश्चित करो कि बहुत ज़ोर से नहीं ब्रश कर रहे। बहुत डेंटिस्ट कहते हैं कि कठोर ब्रश और ज़ोर से ब्रश करना दाँतों को नुक़सान पहुँचाता है।
हल: सॉफ़्ट टूथब्रश इस्तेमाल करो। सॉफ़्ट मसाज की तरह सोचो — आक्रामक ब्रशिंग enamel erosion का कारण बन सकती है।
3. दाँत पीसना
ये आदत दाँतों पर साफ़ नुक़सान कर सकती है। शायद ऐसा भी लगे कि मुंह पूरा खुल नहीं रहा या चबाते वक़्त दर्द होता है।
हल: रिलैक्सेशन एक्सरसाइज़ और नाइट गार्ड। रात की ट्रे दाँतों का नुक़सान कम करती है और दर्द कम होता है — साथ ही नींद भी बेहतर।
4. बर्फ़ चबाना
Enamel क्रिस्टल है। बर्फ़ क्रिस्टल है। दो क्रिस्टल एक दूसरे से टकराओ — एक टूटेगा। ज़्यादातर बर्फ़ टूटती है, पर कभी दाँत या फ़िलिंग भी टूटती है।
हल: बिना बर्फ़ की ठंडी ड्रिंक पियो या स्ट्रॉ इस्तेमाल करो। बर्फ़ चबाने का नुक़सान मज़े से कहीं ज़्यादा है।
5. दाँतों को टूल की तरह इस्तेमाल करना
बोतल या पैकेजिंग खोलने के लिए दाँतों का इस्तेमाल कभी अच्छा आइडिया नहीं। इस बुरी आदत से दाँत टूट सकते हैं। यहाँ तक कि डैमेज दाँत के लिए implant लगाना पड़ सकता है। अगली बार कैंची या बॉटल ओपनर इस्तेमाल करो — दाँत तुम्हारा शुक्रिया करेंगे।
6. लगातार स्नैकिंग
दिनभर मीठा खाना या पीना कैविटी का कारण बन सकता है — मुंह का pH न्यूट्रलाइज़ नहीं हो पाता। खाने के बाद बैक्टीरिया खाने के अवशेषों से न्यूट्रिशन लेते हैं और बनी हुई एसिड से होल बन सकते हैं।
हल: बैलेंस्ड खाओ ताकि लंबे वक़्त तक पेट भरा रहे। स्नैक चाहिए तो लो-फ़ैट और कम शक्कर वाला लो। कभी-कभार चीनी का क्रेविंग हो, तो बड़ा गिलास पानी से ख़त्म करो ताकि अवशेष धुल जाएँ।
7. स्मोकिंग
स्मोकिंग दाँतों को गंदा करती है, फेफड़ों की बीमारी कर सकती है और परमानेंट दाँत खोने तक ले जा सकती है। साँस की बदबू और कैविटी का रिस्क बहुत बढ़ाती है। तंबाकू प्रोडक्ट्स ओरल कैंसर के मुख्य कारण हैं — कहने की ज़रूरत नहीं। ये शीशा और ई-सिगरेट के लिए भी सच है।
हल: मुश्किल है, पर लंबे-समय में सिर्फ़ छोड़ना ही मदद करता है।
8. बहुत कॉफ़ी पीना
सिगरेट की तरह कॉफ़ी भी दाँतों पर दाग छोड़ती है। हेल्थ इशू सिर्फ़ तब आते हैं जब कॉफ़ी में शक्कर डालो।
हल: बिना चीनी के पीने की कोशिश करो और मात्रा कम करो।
9. अंगूठा चूसना
छोटे बच्चे और बेबीज़ अक्सर अंगूठा चूसते हैं — दाँत आते वक़्त या शांत होने के लिए। पर 5 साल और ऊपर इस आदत को छोड़ना चाहिए। दूध के दाँत गिरने के बाद अंगूठा चूसना जबड़े की ग़लत बढ़त का कारण बन सकता है। आम तौर पर overbite होता है और ऑर्थोडॉन्टिक इलाज से ठीक करना पड़ता है।
10. कम पानी पीना
पानी सिर्फ़ शरीर के लिए नहीं, दाँतों के लिए भी बहुत अहम है। दाँत और मसूड़े भी डिहाइड्रेशन से बाक़ी शरीर की तरह तकलीफ़ उठा सकते हैं। ये कम पानी पीने से हो सकता है या मुंह से साँस लेने से। हाइजीन के लिए भी खाने के बाद या रेड वाइन जैसी रंगीन ड्रिंक के बाद एक गिलास पानी बहुत ज़रूरी है। खाने के अवशेष धुल जाते हैं और रंग दाँतों पर कम चिपकता है।

